सुविचार 5022
_ न जाने क्यों कदम अपने आप रुक जाते हैं, और भीतर कहीं से एक सवाल उभर आता है.. आख़िर जाना कहाँ है ?
_ क्या कोई निश्चित मंज़िल है, या ये रास्ते ही मंज़िल बन जाते हैं ?
_ ज़िंदगी भी तो एक अनवरत यात्रा है, जहाँ हर ठहराव हमें सोचने पर मजबूर करता है .. कि हम जिस ओर बढ़ रहे हैं, वह सच में हमारा होना चाहिए या नहीं..
_ शायद पहुँच जाना कहीं दूर नहीं, बल्कि सही दिशा में बढ़ते रहना ही असली पहुँच है.!!
सुविचार 5021
_ ये करेंगे वो करेंगे.. वो तो बस ख़्वाब हैं.!!
मस्त विचार 4895
_ लेकिन रास्ता रोकने के लिए सब फुर्सत में.!!
मस्त विचार 4894
सुविचार 5020
_ कोई भी आपके लिए ज़्यादा देर तक कुछ नहीं करना चाहता,
_ वो आपको कुछ करने का सुझाव दे सकता है, लेकिन आपको सब अकेले ही करना होगा.
_ यही इस दुनिया की त्रासदी है.. कोई भी आपको बचाने नहीं आ रहा है.!!
मस्त विचार 4893
सुविचार 5019
_ लेकिन सच तो यह है कि.. हमने सही लोगों के लिए कोशिश ही नहीं की.
_ वे हमारे सामने थे और हमने कुछ नहीं किया, क्योंकि वे उबाऊ लगते हैं..
_ सही लोग हमेशा अच्छे और उबाऊ होते हैं और उन्हें कौन चाहेगा ? कोई नहीं..
_ क्योंकि वे उबाऊ लगते हैं.!!
सुविचार 5018
_ दूसरा कोना भरता है तो तीसरा कोना खाली हो जाता है.
_ तीसरा भरता है तो चौथा… मन में अनेक कोने होते हैं जो सारे कभी नहीं भरते.
_ एक न एक कोना हमेशा खाली रहता है.!!
मस्त विचार 4892
_ यहाँ लोग पलकों पे बिठाते हैं नजरों से गिराने के लिए.!!
_ एक तरफ बचेंगे तो दूसरी तरफ गिर जाएंगे.!!






